उत्तराखंड के कोटद्वार क्षेत्र में एक 17 वर्षीय नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और बाल विवाह के गंभीर मामले में न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
गिरफ्तार होने वालों में दूल्हा आकाश, उसकी मां नीतू, और नाबालिग के माता-पिता शामिल हैं।
चारों को पौड़ी जेल भेजा गया है।
📝 क्या है पूरा मामला?
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4 जुलाई को कोटद्वार निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि
उसकी नाबालिग बेटी को बिजनौर के रायपुर सादात निवासी आकाश और उसकी मां नीतू बहला-फुसलाकर ले गए, और जबरन उसका विवाह करा दिया गया। -
शिकायत पर कोटद्वार पुलिस ने
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) के तहत मुकदमा दर्ज किया।
💔 प्रेम प्रसंग और ‘सहमति से बाल विवाह’ की चौंकाने वाली परतें
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जांच में सामने आया कि किशोरी और आकाश के बीच प्रेम संबंध थे।
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8 अप्रैल को किशोरी अपने घर से आकाश के साथ चली गई थी,
और आकाश की मां किशोरी को कोटद्वार कोतवाली लेकर आई थीं। -
वहां किशोरी ने किसी तरह की जबरदस्ती या यौन शोषण से इनकार किया।
👉 पुलिस ने काउंसलिंग के बाद किशोरी को उसके माता-पिता को सौंप दिया।
चौंकाने वाली बात: इसके बाद किशोरी के माता-पिता ने ही सहमति से आकाश से बेटी की शादी कर दी – जबकि वह अब भी नाबालिग थी।
⚖️ न्यायालय का सख्त रुख – सभी को भेजा गया जेल
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न्यायालय ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए
किशोरी के माता-पिता, आकाश और उसकी मां को दोषी माना,
और पुलिस को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। -
कोटद्वार कोतवाल रमेश तनवार ने बताया कि चारों को गिरफ्तार कर
पौड़ी जेल भेज दिया गया है।
🔍 कानून की दृष्टि से ‘सहमति से बाल विवाह’ भी अपराध
🔴 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (PCMA) के अनुसार –
18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के का विवाह अवैध और दंडनीय अपराध है,
चाहे माता-पिता की सहमति हो या लड़की की।
